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Maner Ganga Erosion Scam: मनेर में कटावरोधी कार्य में बड़ा घोटाला, बालू की जगह मिट्टी भरने का आरोप

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पटना के मनेर स्थित हल्दीछपड़ा में गंगा नदी किनारे चल रहे कटावरोधी कार्य में भारी अनियमितता का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने बालू की जगह मिट्टी भरने और मानक से कम सामग्री उपयोग करने का वीडियो वायरल किया है।

पटना/आलम की खबर: बिहार में बाढ़ और नदी कटाव से बचाव के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन कई योजनाएं भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ जाती हैं। ताजा मामला पटना जिले के मनेर प्रखंड स्थित हल्दीछपड़ा इलाके का है, जहां गंगा नदी किनारे चल रहे कटावरोधी कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर घटिया निर्माण कराया जा रहा है और अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन की खुली लूट हो रही है।

हल्दीछपड़ा इलाके में गंगा नदी के तेज कटाव से कई गांव वर्षों से प्रभावित होते रहे हैं। हर बरसात में ग्रामीणों के सामने खेत, घर और सड़क बचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। इसी खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग की ओर से कटावरोधी कार्य शुरू कराया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि मजबूत निर्माण से इस बार बाढ़ और कटाव से राहत मिलेगी, लेकिन अब पूरा मामला विवादों में घिर गया है।

ग्रामीणों के मुताबिक नदी किनारे दो अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कटावरोधी निर्माण कराया जा रहा है। सरकारी प्राक्कलन के अनुसार जियो बैग और ईसी बैग में निर्धारित मात्रा में बालू भरकर मजबूत संरचना तैयार करनी होती है। इसके जरिए नदी के बहाव को नियंत्रित करने और तट को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां बालू की जगह मिट्टी भरकर काम किया जा रहा है।

लोगों का कहना है कि 125 किलो क्षमता वाले जियो बैग में पर्याप्त सामग्री नहीं भरी जा रही। इसी तरह 50 किलो वाले बैगों में भी मानक से काफी कम वजन की मिट्टी भरी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार कई जगहों पर निर्माण की ऊंचाई और चौड़ाई भी तय मानक से कम रखी गई है। इससे पूरे निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दिन के समय काम धीमी गति से होता है, जबकि देर शाम और रात में तेजी से निर्माण कराया जाता है। लोगों का कहना है कि अंधेरे का फायदा उठाकर जल्दबाजी में घटिया काम किया जा रहा है ताकि ज्यादा लोग इसे देख न सकें। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने वालों पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।

मामला तब और ज्यादा चर्चा में आया जब स्थानीय लोगों ने कथित गड़बड़ियों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में कथित तौर पर मिट्टी से भरे बैग और कमजोर निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद विभाग में हलचल बढ़ गई और अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा।

जानकारी के अनुसार विभाग के मुख्य अभियंता एजाज कलीम निरीक्षण के लिए हल्दीछपड़ा पहुंचे। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई। लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना और जल्दबाजी में निरीक्षण पूरा कर लिया।

इस पूरे मामले में सहायक अभियंता संजय कुमार सुमन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी प्रमंडल में तैनात हैं और ठेकेदारों के साथ उनका गहरा संबंध बन चुका है। लोगों का आरोप है कि इसी वजह से घटिया निर्माण के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही।

हल्दीछपड़ा और आसपास के गांवों में रहने वाले लोग पहले से ही बाढ़ और कटाव के डर में जिंदगी गुजारते हैं। हर साल नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि कटावरोधी कार्य सही तरीके से नहीं हुआ तो आने वाले मानसून में हालात और खराब हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नदी कटाव रोकने के लिए बनाए जाने वाले सुरक्षा ढांचे में गुणवत्ता सबसे अहम होती है। यदि निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों से समझौता किया जाए तो पूरा ढांचा कुछ ही दिनों में कमजोर पड़ सकता है। यही कारण है कि ग्रामीण इस मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि अब वे विभागीय सचिव और संबंधित मंत्री से मिलकर लिखित शिकायत करेंगे और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करेंगे।

इधर प्रशासन की ओर से फिलहाल जांच जारी होने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर बिहार में बाढ़ सुरक्षा योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता नहीं रहेगी तो इसका खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ेगा।

गंगा किनारे बसे गांवों के लोग अब सिर्फ इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार और विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर पूरे इलाके की नजर टिकी रहेगी।

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